आंध्र प्रदेश: हाईकोर्ट प्रतिबंध के बावजूद संक्रांति के दौरान मुर्गा लड़ाई और अवैध सट्टेबाजी जारी
हाईकोर्ट के प्रतिबंध के बावजूद आंध्र प्रदेश में संक्रांति के दौरान मुर्गा लड़ाई और अवैध सट्टेबाजी जारी रही, जिसमें सैकड़ों करोड़ रुपये का लेन-देन हुआ।
आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के सख्त निर्देशों और पुलिस प्रतिबंधों के बावजूद, संक्रांति त्योहार के दौरान तटीय आंध्र प्रदेश के कई हिस्सों में मुर्गा लड़ाई और अवैध सट्टेबाजी बड़े पैमाने पर जारी रही। सूत्रों के अनुसार, इन गतिविधियों में सैकड़ों करोड़ रुपये का लेन-देन हुआ।
गोदावरी बेल्ट के कई इलाकों में अस्थायी मैदान बनाए गए, जो छोटे स्टेडियम जैसे दिखते थे। इन आयोजनों में तेज धार वाले ब्लेड लगाए गए मुर्गों को तब तक लड़ाया गया, जब तक एक मुर्गा मर न जाए या पीछे न हट जाए।
स्थानीय लोगों का दावा है कि भोगी से लेकर कनुमा तक तीन दिनों में लगभग ₹1,000 करोड़ का लेन-देन हुआ। आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और तमिलनाडु से हजारों दर्शक इन आयोजनों में शामिल हुए, जिससे गांवों की सड़कों पर लग्जरी कारों और एसयूवी की लंबी कतारें देखी गईं।
इससे पहले, आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने न्यायमूर्ति वेंकट ज्योतिर्मयी प्रतापा की अध्यक्षता में राज्य सरकार और जिला प्रशासन को मुर्गा लड़ाई और सट्टेबाजी पर सख्ती से रोक लगाने के निर्देश दिए थे। अदालत ने पशु कल्याण समितियों और संयुक्त निरीक्षण टीमों के गठन का आदेश दिया था।
पश्चिम गोदावरी, पूर्व गोदावरी, कृष्णा और गुंटूर जिलों के कलेक्टरों को आयोजनों की पहचान कर धारा 144 लागू करने के निर्देश दिए गए थे। कोर्ट ने नियमों के उल्लंघन पर अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही भी तय की थी।
कुछ इलाकों में पुलिस ने कार्रवाई की। एलुरु जिले के कृष्णा राव पालम गांव में अस्थायी पंडालों को ध्वस्त किया गया। एलुरु एसपी प्रताप शिव किशोर ने चेतावनी दी कि आयोजनकर्ताओं, वित्तपोषकों और प्रतिभागियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
हालांकि, कई स्थानों पर मुर्गा लड़ाई जारी रही। सूत्रों के अनुसार, कई राजनीतिक नेता और विधायक भी इन आयोजनों में देखे गए और कथित तौर पर सट्टेबाजी में शामिल रहे।
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