ईरान में विरोध प्रदर्शन धीमे पड़े, कड़े दमन और इंटरनेट ब्लैकआउट के बीच ट्रंप के बयानों से उलझन
ईरान में विरोध प्रदर्शन कमजोर पड़ते दिख रहे हैं, लेकिन इंटरनेट ब्लैकआउट, भारी दमन और ट्रंप के विरोधाभासी बयानों के बीच हालात अब भी तनावपूर्ण हैं।
ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों की वह लहर, जिसने हाल के हफ्तों में वैश्विक स्तर पर ध्यान खींचा था, अब धीमी पड़ती दिखाई दे रही है। देश में कई दिनों से जारी इंटरनेट और संचार ब्लैकआउट के कारण नए वीडियो या स्वतंत्र रिपोर्ट सामने नहीं आ पा रहे हैं।
दिसंबर के अंत में शुरू हुए इन प्रदर्शनों पर सरकार ने कड़ा दमन किया, जिसमें हजारों लोगों की मौत की आशंका जताई जा रही है। Iran Human Rights के अनुसार, अब तक 3,428 प्रदर्शनकारियों की मौत की पुष्टि हुई है, हालांकि संगठन का कहना है कि वास्तविक आंकड़ा इससे कहीं अधिक हो सकता है। Associated Press ने भी कार्यकर्ताओं के हवाले से मृतकों की संख्या 3,090 से अधिक बताई है।
प्रदर्शनों की रफ्तार कम होने का समय Donald Trump की ओर से ईरान को दी गई हस्तक्षेप की चेतावनियों के साथ मेल खाता है, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि यह शांति कूटनीति से नहीं, बल्कि दमन और सूचना नियंत्रण से आई है।
इसी बीच, निर्वासित ईरानी राजकुमार Reza Pahlavi ने नए समन्वित विरोध प्रदर्शनों का आह्वान किया है। उन्होंने ईरानियों से सप्ताहांत में फिर से सड़कों पर उतरने और शासन के खिलाफ आवाज़ उठाने की अपील की। उनके पहले संदेशों को सर्वोच्च नेता Ali Khamenei के नेतृत्व वाली सरकार के खिलाफ आंदोलन को तेज करने वाला माना गया था।
फांसी, धमकियां और विरोधाभासी संकेत
डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि ईरान ने सैकड़ों बंदी प्रदर्शनकारियों की फांसी रोक दी है, और इसके लिए ईरानी नेतृत्व की सराहना भी की। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि उन्हें यह जानकारी किससे मिली, या क्या इसका मतलब अमेरिकी सैन्य कार्रवाई से पीछे हटना है।
इसके उलट, ईरान के कट्टरपंथी धार्मिक नेताओं के बयान स्थिति को और भड़काते दिखे। वरिष्ठ मौलवी अयातुल्लाह अहमद खातमी ने सरकारी रेडियो पर दिए गए भाषण में प्रदर्शनकारियों को फांसी देने की मांग की और उन्हें अमेरिका व इज़राइल का एजेंट बताया। उन्होंने ट्रंप और इज़राइल को “कड़ी सज़ा” की धमकी दी।
इंटरनेट बंदी अब भी जारी
डिजिटल निगरानी संस्था NetBlocks के अनुसार, ईरान में पूरी इंटरनेट बंदी 180 घंटे से अधिक समय से जारी है। हालांकि कुछ राहत के तौर पर अंतरराष्ट्रीय फोन कॉल की अनुमति दी गई है, लेकिन SMS और इंटरनेट सेवाएं अब भी बंद हैं। देश के बाहर से ईरान में कॉल करना अभी संभव नहीं है।
मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि मौजूदा शांति भ्रामक हो सकती है और स्थिति अब भी अत्यंत संवेदनशील बनी हुई है, क्योंकि सूचना के अभाव में जमीनी हालात का आकलन मुश्किल है।
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