ओडिशा में विज्ञान और प्रौद्योगिकी —
ओडिशा (उड़ीसा) ने पिछले दो दशकों में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। राजधानी भुवनेश्वर शिक्षा, शोध और नवाचार का उभरता केंद्र बना है। रक्षा अनुसंधान से लेकर कृषि नवाचार, खनिज-आधारित उद्योगों से लेकर आपदा प्रबंधन तकनीक—राज्य ने स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप वैज्ञानिक क्षमता विकसित की है।
रक्षा एवं मिसाइल परीक्षण: Integrated Test Range
बालासोर ज़िले के चांदीपुर स्थित ITR भारत के प्रमुख मिसाइल परीक्षण स्थलों में है। यहाँ विभिन्न सामरिक प्रणालियों का परीक्षण, ट्रैकिंग रडार, टेलीमेट्री और समुद्री सुरक्षा अवसंरचना मौजूद है। इस केंद्र ने ओडिशा को राष्ट्रीय रक्षा अनुसंधान मानचित्र पर विशेष स्थान दिलाया है।
मूलभूत विज्ञान अनुसंधान: National Institute of Science Education and Research (NISER)
NISER में भौतिकी, रसायन, जीवविज्ञान और गणित में उच्चस्तरीय शोध होता है। यहाँ की प्रयोगशालाएँ और अंतरविषयी कार्यक्रम ओडिशा को बुनियादी विज्ञान के क्षेत्र में राष्ट्रीय पहचान देते हैं।
कृषि और जैव-प्रौद्योगिकी: Odisha University of Agriculture and Technology (OUAT)
OUAT उन्नत बीज, मृदा परीक्षण, जल प्रबंधन और फसल सुरक्षा पर काम करता है। चावल, दालें और बागवानी फसलों में उत्पादकता बढ़ाने हेतु तकनीकी समाधान विकसित किए गए हैं। किसानों के लिए विस्तार सेवाएँ (extension) भी सक्रिय हैं।
खनिज, धातु और सामग्री प्रौद्योगिकी: CSIR-IMMT
ओडिशा लौह अयस्क, बॉक्साइट और क्रोमाइट जैसे खनिजों से समृद्ध है। CSIR-IMMT खनिज प्रसंस्करण, धातुकर्म और मूल्यवर्धन तकनीकों पर शोध कर उद्योगों को वैज्ञानिक समाधान देता है।
सूचना प्रौद्योगिकी और कौशल विकास: IIIT Bhubaneswar
IIIT भुवनेश्वर डेटा साइंस, AI, साइबर सुरक्षा और सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग में शिक्षा व शोध को बढ़ावा देता है। स्टार्टअप संस्कृति और हैकाथॉन जैसे आयोजन नवाचार को प्रोत्साहित करते हैं।
आपदा प्रबंधन और मौसम तकनीक
ओडिशा चक्रवात-प्रवण राज्य है। यहाँ प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियाँ, सैटेलाइट डेटा, तटीय रडार और सामुदायिक अलर्ट नेटवर्क विकसित किए गए हैं, जिनसे जान-माल की हानि में उल्लेखनीय कमी आई है। विज्ञान-आधारित आपदा तैयारी ओडिशा की बड़ी उपलब्धि मानी जाती है।
नवीकरणीय ऊर्जा और पर्यावरण
सौर ऊर्जा परियोजनाएँ, तटीय पवन संभावनाएँ, जल संरक्षण और मैंग्रोव पुनर्स्थापन जैसे प्रयास पर्यावरणीय संतुलन को मजबूत करते हैं। ग्रामीण विद्युतीकरण में सोलर मिनी-ग्रिड उपयोगी सिद्ध हुए हैं।
स्टार्टअप और नवाचार पारिस्थितिकी
भुवनेश्वर में इन्क्यूबेशन सेंटर, विश्वविद्यालय-उद्योग सहयोग और सरकारी प्रोत्साहन योजनाएँ युवाओं को टेक-आधारित उद्यम शुरू करने के अवसर देती हैं—एग्री-टेक, हेल्थ-टेक और एड-टेक प्रमुख क्षेत्र हैं।
शिक्षा, अनुसंधान और समाज
स्कूलों में अटल टिंकरिंग लैब, विज्ञान मेलों और कौशल कार्यक्रमों से वैज्ञानिक दृष्टिकोण बढ़ रहा है। विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों का स्थानीय उद्योग व समुदाय से जुड़ाव समाधान-उन्मुख अनुसंधान को बढ़ाता है।
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