बजट 2026 की उम्मीदें: स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ाने, ग्रेच्युटी और NPS टैक्स में राहत पर नजर

बजट 2026 में स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ाने, NPS और ग्रेच्युटी टैक्स में राहत और कैपिटल गेन टैक्स में स्थिरता की उम्मीद।

बजट 2026 की उम्मीदें: स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ाने, ग्रेच्युटी और NPS टैक्स में राहत पर नजर

Nirmala Sitharaman द्वारा 1 फरवरी 2026 को पेश किए जाने वाले केंद्रीय बजट से पहले करदाताओं की उम्मीदें काफी बढ़ गई हैं। इसकी वजह है बजट 2025 में किए गए बड़े आयकर सुधार, जिनके तहत ₹12 लाख तक की आय को टैक्स-फ्री किया गया और 30% टैक्स स्लैब को ₹24 लाख से ऊपर बढ़ाया गया।

अब जब ये बदलाव लागू हो चुके हैं, तो नजरें इस बात पर हैं कि बजट 2026 में सरकार नए टैक्स सिस्टम को और बेहतर बनाने के लिए कौन से कदम उठाती है।

मध्यम वर्ग को और राहत की उम्मीद

Parag Jain, टैक्स हेड, 1 Finance, के अनुसार स्टैंडर्ड डिडक्शन को मौजूदा ₹75,000 से बढ़ाकर ₹1 लाख किए जाने की मजबूत संभावना है। इससे प्रभावी टैक्स-फ्री आय और बढ़ेगी।

उन्होंने यह भी कहा कि 5% टैक्स स्लैब की सीमा को ₹4–8 लाख से आगे बढ़ाने से मध्यम आय वर्ग को अतिरिक्त राहत मिल सकती है। इसके अलावा, नए टैक्स सिस्टम में सीमित रूप से HRA या होम लोन ब्याज जैसे लाभ शामिल किए जाने की अटकलें भी हैं।

ग्रेच्युटी टैक्स में बदलाव संभव

नए लेबर कोड 2026 से लागू होने वाले हैं, जिसके चलते ग्रेच्युटी टैक्स नियमों की समीक्षा की जा सकती है। वर्तमान में टैक्स-फ्री ग्रेच्युटी के लिए 5 साल की सेवा अनिवार्य है।

जैन का मानना है कि बजट 2026 में फिक्स्ड-टर्म कर्मचारियों के लिए 1 साल की पात्रता या प्रो-राटा टैक्स छूट लागू की जा सकती है। साथ ही, टैक्स-फ्री ग्रेच्युटी सीमा को ₹25 लाख तक बढ़ाया जा सकता है, जिससे गिग और कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स को लाभ मिलेगा।

NPS और रिटायरमेंट प्लानिंग

National Pension System (NPS) को लेकर भी टैक्स नियमों में बदलाव की उम्मीद है। 2025 में NPS नियमों के तहत 80% तक कॉर्पस निकासी की अनुमति दी गई, लेकिन आयकर कानून में अभी भी केवल 60% राशि टैक्स-फ्री है।

जैन को उम्मीद है कि बजट 2026 में सेक्शन 10(12A) में संशोधन कर पूरे 80% अमाउंट को टैक्स-फ्री किया जाएगा। साथ ही, सेक्शन 80CCD(1B) के तहत डिडक्शन सीमा को ₹1–1.2 लाख तक बढ़ाया जा सकता है।

पुराना टैक्स सिस्टम अब भी अहम

हालांकि सरकार सरल टैक्स सिस्टम को बढ़ावा दे रही है, लेकिन सीनियर सिटीजन जैसे कुछ वर्गों के लिए पुराना टैक्स सिस्टम अब भी उपयोगी है, क्योंकि इसमें मेडिकल, बीमा और ब्याज आय से जुड़ी छूट मिलती है।

कैपिटल गेन टैक्स पर स्थिरता की उम्मीद

निवेशक कैपिटल गेन टैक्स को लेकर भी सतर्क हैं। Anand K Rathi, को-फाउंडर, MIRA Money, का कहना है कि जुलाई 2024 में बढ़े टैक्स के बाद और बढ़ोतरी निवेशकों की रुचि कम कर सकती है।

उनका सुझाव है कि शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन पर टैक्स बनाए रखा जाए, जबकि लॉन्ग-टर्म निवेश (जैसे 2 साल या उससे अधिक) को टैक्स राहत देकर निवेशकों को लंबे समय तक निवेश के लिए प्रोत्साहित किया जाए।

बजट 2026 में सरकार के सामने चुनौती होगी कि वह सैलरीड टैक्सपेयर्स को राहत, रिटायरमेंट नियमों में तालमेल, और निवेशकों का भरोसा—इन तीनों के बीच संतुलन बनाए रखते हुए वित्तीय अनुशासन भी कायम रखे।