AI का तेज़ विस्तार अमीर और गरीब देशों के बीच खाई बढ़ा सकता है: Anthropic रिपोर्ट
Anthropic की रिपोर्ट के मुताबिक AI का तेज़ प्रसार अमीर और गरीब देशों के बीच आर्थिक असमानता को और बढ़ा सकता है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं और कार्यस्थलों को बदल रहा है, लेकिन इसके फायदे सभी देशों तक समान रूप से नहीं पहुंच रहे हैं। Anthropic की एक नई रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि AI का बढ़ता उपयोग उच्च-आय और निम्न-आय देशों के बीच आर्थिक असमानता को और गहरा कर सकता है।
Amazon और Google समर्थित Anthropic ने अपने चैटबॉट Claude के 10 लाख से अधिक उपयोगकर्ता इंटरैक्शन का विश्लेषण किया। इसमें मुफ्त, भुगतान करने वाले और एंटरप्राइज उपयोगकर्ता शामिल थे। रिपोर्ट में पाया गया कि अमीर देश AI को कहीं ज़्यादा तेज़ी और गहराई से अपना रहे हैं, जबकि गरीब देशों के पीछे रहने के संकेत मिलते हैं।
कंपनी ने कहा कि जैसे-जैसे वह भारत में अपना पहला कार्यालय खोलने की तैयारी कर रही है, उसके आंतरिक अध्ययन यह दिखाते हैं कि AI अपनाने की रफ्तार संपन्न अर्थव्यवस्थाओं में कहीं अधिक है। इसी तरह की चिंता Microsoft भी जता चुका है, जिसने AI को लेकर “ग्लोबल नॉर्थ” और “ग्लोबल साउथ” के बीच बढ़ते अंतर की बात कही है।
Anthropic के प्रमुख अर्थशास्त्री पीटर मैक्रोरी ने फाइनेंशियल टाइम्स से कहा कि यदि AI से मिलने वाले उत्पादकता लाभ केवल शुरुआती अपनाने वाले देशों तक सीमित रहे, तो जीवन स्तर में असमानता और बढ़ सकती है। उन्होंने चेतावनी दी कि विकसित देश AI में भारी निवेश कर और आगे निकल सकते हैं।
मुफ्त और भुगतान वाले AI उपयोग में अंतर
रिपोर्ट के अनुसार, निम्न-आय वाले देश मुख्य रूप से मुफ्त AI टूल्स का इस्तेमाल करते हैं और Claude का उपयोग ज़्यादातर शिक्षा व सीखने के लिए होता है। इसके विपरीत, उच्च-आय वाले देश AI को पेशेवर कामों और उत्पादकता बढ़ाने के लिए अधिक इस्तेमाल करते हैं, जैसे सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग।
शिक्षा भी एक अहम कारक है। बेहतर शिक्षित उपयोगकर्ता AI से ज़्यादा लाभ उठा पाते हैं क्योंकि वे जटिल और उन्नत निर्देश (प्रॉम्प्ट) दे सकते हैं।
नौकरियों पर AI का असर
Anthropic का अनुमान है कि आने वाले दशक में AI अमेरिका में श्रम उत्पादकता को हर साल 1–2 प्रतिशत अंक तक बढ़ा सकता है, खासकर ज्ञान-आधारित क्षेत्रों में। रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 50% नौकरियों में AI का उपयोग कम से कम एक-चौथाई कार्यों में हो सकता है, जो पिछले साल 36% था।
Claude के सबसे बड़े उपयोगकर्ता देशों में अमेरिका, भारत, जापान, ब्रिटेन और दक्षिण कोरिया शामिल हैं। वहीं ब्राज़ील और बाल्कन देशों में एंटरप्राइज उपयोग अधिक है, जबकि इंडोनेशिया शिक्षा क्षेत्र में AI के इस्तेमाल में आगे है।
हालांकि, AI के वास्तविक आर्थिक लाभ अभी स्पष्ट नहीं हैं। MIT के एक अध्ययन के अनुसार, जनरेटिव AI में निवेश करने वाली 95% कंपनियों को अब तक शुद्ध लाभ नहीं मिला है।
यह रिपोर्ट उस समय आई है जब Elon Musk जैसे टेक नेता भविष्य में AI के कारण काम की ज़रूरत खत्म होने की बात कर रहे हैं। Anthropic की रिपोर्ट संकेत देती है कि यह बदलाव न सिर्फ धीमा हो सकता है, बल्कि असमान भी।
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