Gen Z की आवाज़ क्यों बन गई हैं अनन्या पांडे: असली, अधूरी और आकांक्षी

अनन्या पांडे कैसे एक स्टार किड से Gen Z की आवाज़ बन गईं—ईमानदारी, असुरक्षाओं और आत्म-स्वीकृति के साथ एक नई पीढ़ी की पहचान।

Gen Z की आवाज़ क्यों बन गई हैं अनन्या पांडे: असली, अधूरी और आकांक्षी

Ananya Panday कभी ऐसी सेलेब्रिटी नहीं रहीं जिन्हें नज़रअंदाज़ किया जा सके। Student of the Year 2 से बॉलीवुड में कदम रखने के सात साल बाद, वह एक “स्टार किड” से कहीं आगे निकल चुकी हैं। आज अनन्या उन चेहरों में शामिल हैं, जिनसे Gen Z खुद को जोड़ पाता है—कमज़ोरियों के साथ, ईमानदारी के साथ और सपनों के साथ।

उनका करियर सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने विशेषाधिकार (privilege), आलोचना और पहचान के सवालों को बोझ बनने देने के बजाय उन्हें अपनी आवाज़ और मंच में बदल दिया। डेब्यू के समय उन्हें जहां उनके लुक्स और पारिवारिक पृष्ठभूमि के लिए सराहा गया, वहीं अनुभव की कमी को लेकर सवाल भी उठे। खुद अनन्या ने माना है कि शुरुआत में वह खुद को “raw” महसूस करती थीं और दूसरों की धारणाओं द्वारा तय किए गए एक “box” में बंद पाया।

समय के साथ उन्होंने ऐसे प्रोजेक्ट्स और प्लेटफॉर्म चुने, जहां वह प्रयोग कर सकें और अपनी पर्सनैलिटी के अलग-अलग पहलू दिखा सकें। उनकी फैशन और फिटनेस जर्नी सिर्फ परफॉर्मेंस नहीं, बल्कि संतुलन, सेल्फ-केयर और मानसिक स्वास्थ्य की कहानी भी है। जैसा कि उन्होंने कहा था—

“अगर आप अंदर से ठीक नहीं हैं… तो बाकी कुछ भी मायने नहीं रखता।”

धीरे-धीरे अनन्या ने सोच-समझकर फैसले लेने शुरू किए। इंटरव्यूज़ में वह अपने privilege को स्वीकार करती हैं, लेकिन उसके साथ आने वाली ज़िम्मेदारी को भी। Times of India से बात करते हुए उन्होंने कहा था,

“मुझे पता है कि मैं privileged हूं… लेकिन अब मुझे यह मौका मिला है और मैं इसे गंवाना नहीं चाहती… अगर मैं अपने पिता की विरासत को आगे बढ़ा सकूं और उन्हें गर्व महसूस करा सकूं, तो वह मेरे लिए बहुत बड़ी उपलब्धि होगी।”

यही ईमानदारी—अपने फायदे और अपनी असुरक्षाओं को स्वीकार करने की—आज के युवाओं को आकर्षित करती है। Gen Z चमकदार मुखौटों से ज़्यादा सच्चाई को महत्व देता है।

उनकी ग्लोबल मौजूदगी भी लगातार बढ़ी है। 2025 में वह Chanel की पहली भारतीय ग्लोबल एम्बेसडर बनीं। Swarovski से लेकर Jimmy Choo तक के कैंपेन, पेरिस फैशन वीक की फ्रंट रो और उनका सार्वजनिक स्टाइल इवोल्यूशन—सबने उन्हें एक अंतरराष्ट्रीय पहचान दी। सोशल मीडिया पर भी वह सिर्फ फैशन नहीं दिखातीं, बल्कि अपनी असुरक्षा भी साझा करती हैं—चाहे “too skinny” कहे जाने की बात हो या बॉडी इमेज को लेकर आलोचना।

उनकी दोस्ती—सुहाना खान, शनाया कपूर और नव्या नवेली नंदा जैसी यंग सेलेब्रिटीज़ के साथ—नेचुरल लगती है, बनाई हुई नहीं। वह “alone time”, मानसिक स्वास्थ्य ब्रेक्स और boundaries की बात खुलकर करती हैं। यही ऑफ-स्क्रीन ईमानदारी लोगों को यह महसूस कराती है कि वह सिर्फ किरदारों या कपड़ों तक सीमित नहीं हैं।

आज के दौर में, जब Gen Z प्रतिनिधित्व, सच्चाई और अधूरे-पर-असली इंसानों को ढूंढ रहा है, अनन्या पांडे एक तरह का आईना बन गई हैं।
उनकी यही नाज़ुक-मज़बूत संतुलन उन्हें सिर्फ एक सेलेब्रिटी नहीं, बल्कि उस पीढ़ी का प्रतीक बनाता है, जो खुद को जैसे है वैसे स्वीकार करना सीख रही है।