अरविंद केजरीवाल भारत की समकालीन राजनीति के सबसे चर्चित

सामाजिक कार्यकर्ता और पूर्व नौकरशाह के रूप में अपने करियर की शुरुआत की, लेकिन बाद में राजनीति में प्रवेश कर एक नई तरह की राजनीति का मॉडल प्रस्तुत किया। उनकी पहचान एक ऐसे नेता के रूप में बनी

प्रारंभिक जीवन और शिक्षा

अरविंद केजरीवाल का जन्म 16 अगस्त 1968 को हरियाणा के हिसार में हुआ था। उनके पिता एक इलेक्ट्रिकल इंजीनियर थे और परिवार का वातावरण शिक्षा और अनुशासन से भरा हुआ था। केजरीवाल ने अपनी प्रारंभिक पढ़ाई हिसार और अन्य शहरों में की। वे पढ़ाई में शुरू से ही मेधावी रहे। बाद में उन्होंने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) खड़गपुर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की।

IIT से निकलने के बाद उन्होंने कुछ समय निजी क्षेत्र में काम किया, लेकिन जल्द ही उनका रुझान सामाजिक सेवा की ओर बढ़ गया। उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा पास की और भारतीय राजस्व सेवा (IRS) में शामिल हुए।

सामाजिक कार्य और भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन

सरकारी नौकरी के दौरान केजरीवाल ने देखा कि आम जनता को सरकारी सेवाओं में कितनी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने “परिवर्तन” नामक एक संगठन की स्थापना की, जो लोगों को सरकारी दफ्तरों में होने वाले भ्रष्टाचार के खिलाफ मदद करता था। 

उनकाअसली राजनीतिक उदय 2011 के “अन्ना हजारे आंदोलन” से हुआ, जो जन लोकपाल बिल की मांग को लेकर शुरू हुआ था। इस आंदोलन ने देशभर में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक मजबूत जनभावना पैदा की। केजरीवाल इस आंदोलन के प्रमुख चेहरों में से एक थे।

हालांकि, बाद में उन्होंने महसूस किया कि केवल आंदोलन से बदलाव संभव नहीं है, इसलिए उन्होंने राजनीति में उतरने का निर्णय लिया।

आम आदमी पार्टी की स्थापना

2012 में अरविंद केजरीवाल ने “आम आदमी पार्टी” (AAP) की स्थापना की। पार्टी का मुख्य उद्देश्य था—ईमानदार राजनीति, पारदर्शिता और आम लोगों की भागीदारी।

AAP ने खुद को पारंपरिक राजनीतिक दलों से अलग दिखाने की कोशिश की। पार्टी ने “आम आदमी” के मुद्दों जैसे—बिजली, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य पर फोकस किया।

दिल्ली की राजनीति में उभार

2013 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने पहली बार हिस्सा लिया और चौंकाने वाला प्रदर्शन किया। केजरीवाल ने तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को हराया।

हालांकि, उनकी पहली सरकार केवल 49 दिन ही चली क्योंकि उन्होंने जन लोकपाल बिल पास न होने के कारण इस्तीफा दे दिया। इस फैसले की काफी आलोचना भी हुई, लेकिन इससे उनकी छवि एक सिद्धांतवादी नेता की बनी।

2015 और 2020 की ऐतिहासिक जीत

2015 के दिल्ली चुनाव में AAP ने 70 में से 67 सीटें जीतकर इतिहास रच दिया। यह भारतीय राजनीति में एक बड़ी घटना थी।

2020 में भी पार्टी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 62 सीटें जीतीं। इन जीतों ने केजरीवाल को एक मजबूत और स्थिर नेता के रूप में स्थापित कर दिया।

शासन मॉडल और नीतियां

अरविंद केजरीवाल की सरकार को “दिल्ली मॉडल” के लिए जाना जाता है। इसमें मुख्य रूप से निम्न क्षेत्रों पर ध्यान दिया गया:

1. शिक्षा

दिल्ली सरकार ने सरकारी स्कूलों में बड़े पैमाने पर सुधार किए। स्कूलों के ढांचे को आधुनिक बनाया गया, शिक्षकों को ट्रेनिंग दी गई और छात्रों के परिणामों में सुधार हुआ।

2. स्वास्थ्य

“मोहल्ला क्लीनिक” उनकी सबसे चर्चित योजनाओं में से एक है। इन क्लीनिकों के जरिए लोगों को मुफ्त प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।

3. बिजली और पानी

दिल्ली में बिजली और पानी पर सब्सिडी दी गई, जिससे आम लोगों को राहत मिली। यह नीति बेहद लोकप्रिय रही।

4. महिला सुरक्षा

महिलाओं के लिए बसों में मुफ्त यात्रा और CCTV कैमरों की स्थापना जैसी योजनाएं शुरू की गईं।

राजनीतिक शैली और आलोचना

केजरीवाल की राजनीति को “विकास और वेलफेयर” की राजनीति कहा जाता है। वे अक्सर खुद को आम आदमी के नेता के रूप में पेश करते हैं।

हालांकि, उन्हें कई आलोचनाओं का भी सामना करना पड़ा है:

विरोधी उन्हें “लोकलुभावन” (populist) नेता कहते हैं

केंद्र सरकार के साथ उनके टकराव अक्सर चर्चा में रहते हैं

कुछ लोग उनकी नीतियों को वित्तीय रूप से टिकाऊ नहीं मानते

राष्ट्रीय राजनीति में भूमिका

हाल के वर्षों में आम आदमी पार्टी ने दिल्ली से बाहर भी विस्तार किया है। पंजाब में पार्टी की सरकार बनी, जो केजरीवाल के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती है।

AAP अब खुद को एक राष्ट्रीय विकल्प के रूप में पेश करने की कोशिश कर रही है।

व्यक्तिगत जीवन

अरविंद केजरीवाल की पत्नी सुनीता केजरीवाल भी IRS अधिकारी रह चुकी हैं। उनके दो बच्चे हैं। वे सादा जीवन जीने के लिए जाने जाते हैं और अक्सर खुद को एक आम नागरिक के रूप में प्रस्तुत करते हैं।