आईएमडी ने जारी किया भारी वर्षा का अलर्ट: केरल में रेड अलर्ट, पूर्वोत्तर और कई राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी
आईएमडी ने जारी किया भारी वर्षा का अलर्ट: केरल में रेड अलर्ट, पूर्वोत्तर और कई राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी
आईएमडी ने जारी किया भारी वर्षा का अलर्ट: केरल में रेड अलर्ट, पूर्वोत्तर और कई राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी
प्रस्तावना
भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून अपने चरम पर है और इसके प्रभाव से देश के अनेक हिस्सों में लगातार भारी से अत्यधिक भारी वर्षा हो रही है। इसी स्थिति को देखते हुए भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने केरल के कई जिलों के लिए रेड अलर्ट जारी किया है। इसके अलावा असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक और महाराष्ट्र के कई हिस्सों में भी भारी वर्षा की चेतावनी दी गई है।
मौसम विभाग के अनुसार अगले कुछ दिनों तक कई राज्यों में मूसलाधार बारिश जारी रह सकती है। लगातार हो रही वर्षा के कारण नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है, पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन का खतरा बना हुआ है और कई शहरों में जलभराव की समस्या गंभीर होती जा रही है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अनावश्यक यात्रा से बचें, मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करें और किसी भी आपात स्थिति में स्थानीय प्रशासन से संपर्क करें।
रेड अलर्ट का क्या अर्थ है?
भारतीय मौसम विभाग चार प्रकार के मौसम अलर्ट जारी करता है—
1. ग्रीन अलर्ट
स्थिति सामान्य है और किसी विशेष खतरे की संभावना नहीं होती।
2. येलो अलर्ट
मौसम में बदलाव की संभावना होती है। लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी जाती है।
3. ऑरेंज अलर्ट
खराब मौसम के कारण सामान्य जनजीवन प्रभावित हो सकता है। प्रशासन विशेष तैयारियाँ करता है।
4. रेड अलर्ट
यह सबसे गंभीर चेतावनी होती है। इसका अर्थ है कि अत्यधिक भारी वर्षा, बाढ़, भूस्खलन या अन्य प्राकृतिक आपदाओं का गंभीर खतरा है। ऐसे समय में लोगों को घरों में रहने, सुरक्षित स्थानों पर जाने तथा प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की सलाह दी जाती है।
मौसम की वर्तमान स्थिति
इस समय अरब सागर और बंगाल की खाड़ी दोनों से लगातार नमी आ रही है। बंगाल की खाड़ी में बना निम्न दबाव का क्षेत्र (Low Pressure Area) मानसूनी हवाओं को और अधिक सक्रिय बना रहा है। पश्चिमी घाट से टकराने वाली नम हवाओं के कारण केरल, कर्नाटक और महाराष्ट्र में भारी वर्षा हो रही है।
दूसरी ओर पूर्वोत्तर भारत में भी मानसूनी बादल लगातार सक्रिय हैं। हिमालयी क्षेत्रों में वर्षा के कारण नदियों में जलस्तर बढ़ गया है, जिससे निचले इलाकों में बाढ़ की आशंका बढ़ गई है।
केरल सबसे अधिक प्रभावित
केरल में लगातार कई दिनों से हो रही वर्षा के कारण अनेक जिलों में स्थिति गंभीर बनी हुई है। कई स्थानों पर सड़कें जलमग्न हो गई हैं, पुलों पर पानी बह रहा है और छोटी नदियाँ उफान पर हैं।
संभावित प्रभाव
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बाढ़ की स्थिति
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भूस्खलन
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बिजली आपूर्ति बाधित होना
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पेड़ गिरना
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सड़कें बंद होना
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रेल सेवाओं में देरी
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उड़ानों पर प्रभाव
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स्कूल एवं कॉलेज बंद होने की संभावना
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कृषि भूमि में जलभराव
विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिमी घाट के पहाड़ी क्षेत्रों में अत्यधिक वर्षा के कारण मिट्टी कमजोर हो जाती है, जिससे भूस्खलन की घटनाएँ तेजी से बढ़ती हैं।
पूर्वोत्तर भारत में भारी वर्षा
असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में भी भारी बारिश की संभावना जताई गई है।
इन राज्यों में बड़ी संख्या में नदियाँ बहती हैं। लगातार वर्षा होने से ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है।
इसके कारण—
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गांवों में बाढ़
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खेतों में पानी भरना
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सड़क संपर्क टूटना
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पुलों को नुकसान
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हजारों लोगों का विस्थापन
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राहत शिविरों की आवश्यकता
पूर्वोत्तर के पहाड़ी क्षेत्रों में भी भूस्खलन का गंभीर खतरा बना हुआ है।
देश के अन्य राज्यों में भी अलर्ट
केवल केरल ही नहीं बल्कि कई अन्य राज्यों में भी मौसम विभाग ने चेतावनी जारी की है।
इनमें शामिल हैं—
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ओडिशा
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पश्चिम बंगाल
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बिहार
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झारखंड
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उत्तराखंड
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हिमाचल प्रदेश
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महाराष्ट्र
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कर्नाटक
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गोवा
इन क्षेत्रों में तेज बारिश के साथ बिजली चमकने और तेज हवाएँ चलने की संभावना है।
शहरी क्षेत्रों में जलभराव की समस्या
भारत के बड़े शहरों में कुछ घंटों की भारी वर्षा भी गंभीर जलभराव का कारण बन जाती है।
इसके पीछे प्रमुख कारण हैं—
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अपर्याप्त जल निकासी व्यवस्था
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नालों पर अतिक्रमण
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अनियोजित शहरीकरण
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प्लास्टिक कचरे से जाम नालियाँ
मुंबई, बेंगलुरु, कोच्चि, तिरुवनंतपुरम और अन्य शहरों में भारी बारिश के दौरान यातायात पूरी तरह प्रभावित हो सकता है।
वाहनों की लंबी कतारें, घंटों तक ट्रैफिक जाम और सार्वजनिक परिवहन में देरी आम बात हो जाती है।
बाढ़ का बढ़ता खतरा
लगातार वर्षा होने पर नदियाँ अपने खतरे के निशान से ऊपर बहने लगती हैं।
बाढ़ से होने वाले प्रमुख नुकसान—
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मकानों का क्षतिग्रस्त होना
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फसलों की बर्बादी
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पशुधन की हानि
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पेयजल स्रोतों का दूषित होना
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संक्रामक रोगों का फैलना
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आर्थिक गतिविधियों पर असर
ग्रामीण क्षेत्रों में बाढ़ के कारण हजारों परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाना पड़ सकता है।
भूस्खलन क्यों होता है?
पहाड़ी क्षेत्रों में जब लगातार वर्षा होती है, तब मिट्टी में अत्यधिक नमी भर जाती है। इससे चट्टानों और मिट्टी की पकड़ कमजोर हो जाती है।
इसके परिणामस्वरूप—
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पहाड़ों से मिट्टी खिसकती है।
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सड़कें बंद हो जाती हैं।
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वाहन फंस जाते हैं।
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घर क्षतिग्रस्त हो जाते हैं।
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बिजली और संचार सेवाएँ प्रभावित होती हैं।
इसी कारण पर्वतीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को विशेष सतर्क रहने की सलाह दी जाती है।
प्रशासन की तैयारियाँ
स्थिति को देखते हुए विभिन्न राज्य सरकारों ने व्यापक तैयारियाँ की हैं—
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एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें तैनात।
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राहत शिविर स्थापित।
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नावों और बचाव उपकरणों की व्यवस्था।
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मेडिकल टीमें अलर्ट पर।
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24×7 कंट्रोल रूम सक्रिय।
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नदी जलस्तर की लगातार निगरानी।
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संवेदनशील क्षेत्रों में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजने की तैयारी।
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