13वीं BRICS शिक्षा मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक: भुवनेश्वर, ओडिशा
13वीं BRICS शिक्षा मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक: भुवनेश्वर, ओडिशा
13वीं BRICS शिक्षा मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक: भुवनेश्वर, ओडिशा
5 अगस्त 2026 को भुवनेश्वर, ओडिशा में 13वीं BRICS शिक्षा मंत्रियों की बैठक और वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक का औपचारिक शुभारंभ हुआ। भारत की 2026 BRICS अध्यक्षता के तहत आयोजित इस उच्च स्तरीय सम्मेलन में विस्तारित BRICS ब्लॉक—जिसमें संस्थापक और पुराने सदस्य (ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका) और नए पूर्ण सदस्य (जैसे मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात) शामिल हैं—के शिक्षा मंत्रियों, वरिष्ठ नीति निर्माताओं, राजनयिकों और तकनीकी विशेषज्ञों ने भाग लिया।
भुवनेश्वर—जो प्रौद्योगिकी, अनुसंधान और अकादमिक उत्कृष्टता (जैसे IIT भुवनेश्वर, NISER, AIIMS भुवनेश्वर और KIIT) के लिए विश्व स्तर पर एक उभरता हुआ केंद्र है—ने अंतर-संस्थागत सहयोग, डिजिटल समावेशन, TVET (तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण) मानकीकरण और संयुक्त अनुसंधान ढांचे पर केंद्रित चर्चाओं के लिए एक आदर्श मंच प्रदान किया।
मुख्य संदर्भ: 2026 में BRICS शिक्षा के लिए भारत का दृष्टिकोण
"समावेशी, लचीले और डिजिटल भविष्य के लिए ज्ञान प्रणालियों को जोड़ना" के मुख्य विषय के तहत, भारत के शिक्षा मंत्रालय ने BRICS अर्थव्यवस्थाओं की सामूहिक क्षमताओं को वैश्विक शैक्षिक परिवर्तनों के साथ जोड़ने के लिए इस शिखर सम्मेलन का ढांचा तैयार किया।
[ 13वां BRICS शिक्षा मंत्री शिखर सम्मेलन ]
(भुवनेश्वर)
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│ डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर │ │ अकादमिक और अनुसंधान │ │ कौशल और व्यावसायिक │
│ और AI एकीकरण │ │ नेटवर्क │ │ प्रशिक्षण (TVET) │
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│ • BRICS डिजिटल डेस्क │ │ • BRICS नेटवर्क वि.वि. │ │ • सीमा पार कौशल │
│ • खुले शैक्षिक संसाधन │ │ • संयुक्त पीएचडी और │ │ मान्यता │
│ (OER) │ │ पोस्टडॉक्टोरल फेलोशिप│ │ • TVET मोबिलिटी पोर्टल │
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ये चर्चाएँ वैश्विक शिक्षा नीति निर्माण में एक महत्त्वपूर्ण मोड़ को दर्शाती हैं, जहाँ सदस्य देश विभिन्न सामाजिक-आर्थिक वर्गों में समान पहुँच सुनिश्चित करने के साथ-साथ तीव्र तकनीकी प्रगति (विशेष रूप से जनरेटिव AI और स्वचालन) को संतुलित कर रहे हैं।
शिखर सम्मेलन के एजेंडे का विस्तृत विवरण
1. वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक (SOM): तकनीकी विचार-विमर्श
कार्यक्रम की शुरुआत वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक के साथ हुई, जिसकी अध्यक्षता भारत के उच्च शिक्षा विभाग और शिक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ नेतृत्व ने की। प्रतिनिधिमंडलों ने प्रमुख द्विपक्षीय और बहुपक्षीय पहलों के लिए कार्रवाई योग्य कार्यान्वयन मार्ग स्थापित करने के लिए गहन तकनीकी मसौदा तैयार किया।
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मौजूदा ढाँचों की समीक्षा: अधिकारियों ने BRICS नेटवर्क यूनिवर्सिटी (NU) प्रोटोकॉल और BRICS यूनिवर्सिटी लीग के तहत हुई प्रगति की समीक्षा की। चर्चाओं में ऊर्जा, कंप्यूटर विज्ञान और स्वच्छ तकनीक, जल संसाधन, पृथ्वी विज्ञान और अर्थशास्त्र जैसे विषयगत समूहों की सदस्यता का विस्तार करने पर ध्यान केंद्रित किया गया ताकि नए सदस्य राज्यों को आसानी से शामिल किया जा सके।
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क्रेडिट ट्रांसफर प्रोटोकॉल का मानकीकरण: एक प्राथमिक तकनीकी ध्यान बिना किसी प्रशासनिक देरी के सदस्य देशों में छात्रों की आवाजाही (Student Mobility) को आसान बनाने के लिए एक मानकीकृत अकादमिक क्रेडिट मान्यता मैट्रिक्स स्थापित करने पर था।
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संयुक्त घोषणा का मसौदा: वरिष्ठ अधिकारियों ने भुवनेश्वर शिक्षा घोषणापत्र के पाठ को अंतिम रूप दिया, जिससे संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं के लिए बहुपक्षीय वित्त पोषण तंत्र पर सहमति सुनिश्चित हुई।
2. शिक्षा मंत्रियों का पूर्ण सत्र (Plenary Session)
मंत्रिस्तरीय पूर्ण सत्र में भारत के केंद्रीय शिक्षा मंत्री, भाग लेने वाले BRICS देशों के अतिथि मंत्रियों और यूनेस्को एवं क्षेत्रीय अकादमिक निकायों के प्रतिनिधियों के संबोधन शामिल थे।
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| भुवनेश्वर घोषणापत्र: 4 मुख्य स्तंभ |
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| स्तंभ | रणनीतिक उद्देश्य |
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| 1. डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर | ओपन-सोर्स लर्निंग प्लेटफॉर्म, सीमा पार OER शेयरिंग |
| 2. अनुसंधान एवं नवाचार | जलवायु, AI, बायोटेक और स्वच्छ ऊर्जा के लिए बहुपक्षीय अनुदान |
| 3. TVET और कौशल वैश्वीकरण | व्यावसायिक योग्यताओं और ट्रेडों की पारस्परिक मान्यता |
| 4. संस्थागत गतिशीलता | सरलीकृत अकादमिक वीजा, संयुक्त और दोहरी डिग्री कार्यक्रम |
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स्तंभ A: शिक्षा में डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI)
पीएम ई-विद्या, दीक्षा (DIKSHA) और स्वयं (SWAYAM) प्लेटफॉर्म जैसे डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के भारत के सफल क्रियान्वयन के आधार पर, भारत ने एक साझा BRICS डिजिटल नॉलेज ग्रिड की योजना प्रस्तुत की।
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खुले शैक्षिक संसाधन (OER): सदस्य देश सदस्य राज्यों की प्राथमिक भाषाओं (हिंदी, मंदारिन, रूसी, पुर्तगाली, अरबी और फ़ारसी सहित) में सहकर्मी-समीक्षित (peer-reviewed) डिजिटल पाठ्यपुस्तकों, STEM सिमुलेशन और व्याख्यान श्रृंखलाओं का एक साझा केंद्र (Repository) बनाने पर सहमत हुए।
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शिक्षाशास्त्र में AI नैतिकता: मंत्रियों ने प्राथमिक और उच्च शिक्षा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को एकीकृत करने पर दिशानिर्देश अपनाए। इसका मुख्य उद्देश्य डेटा गोपनीयता और अकादमिक अखंडता की रक्षा करते हुए वंचित समुदायों के लिए सीखने की प्रक्रिया को आसान बनाना है।
स्तंभ B: TVET और व्यावसायिक कौशल की पारस्परिक मान्यता
यह स्वीकार करते हुए कि वैश्विक श्रम बाजार में लचीली और कौशल-आधारित योग्यताओं की आवश्यकता है, शिखर सम्मेलन ने तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण (TVET) को प्राथमिकता दी।
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कौशल मान्यता ढांचा: प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रीय योग्यता ढाँचों (NQFs) को संरेखित करने के लिए व्यावसायिक योग्यताओं पर एक BRICS वर्किंग ग्रुप स्थापित करने पर सहमत हुए। यह उपाय सुनिश्चित करता है कि नवीकरणीय ऊर्जा, स्वास्थ्य सेवा सहायता, डिजिटल विनिर्माण और रोबोटिक्स जैसे क्षेत्रों में प्रमाणपत्रों को सभी BRICS अर्थव्यवस्थाओं में मान्यता मिले।
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BRICS कौशल प्रतियोगिता: भारत ने उभरते तकनीकी क्षेत्रों में युवाओं की भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए एक वार्षिक BRICS कौशल प्रतियोगिता आयोजित करने का प्रस्ताव रखा।
स्तंभ C: BRICS नेटवर्क यूनिवर्सिटी के माध्यम से अनुसंधान साझेदारी को गहरा करना
मंत्रियों ने BRICS नेटवर्क यूनिवर्सिटी (NU) के परिचालन पैमाने का मूल्यांकन किया।
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लक्ष्य अनुसंधान क्लस्टर: शिखर सम्मेलन ने संयुक्त वित्तपोषण के लिए चार प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की पहचान की:
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जलवायु लचीलापन और समुद्र विज्ञान
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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम कंप्यूटिंग और साइबर सुरक्षा
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किफायती स्वास्थ्य सेवा और जैव प्रौद्योगिकी
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सतत कृषि और खाद्य सुरक्षा
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पोस्टडॉक्टोरल एक्सचेंज अनुदान: शीर्ष-स्तरीय सदस्य संस्थानों में प्रतिवर्ष 500 तक संयुक्त पोस्टडॉक्टोरल अनुसंधान अनुदान प्रायोजित करने के लिए एक नए गतिशीलता ढांचे का प्रस्ताव रखा गया।
ओडिशा और मेजबान संस्थानों के लिए रणनीतिक महत्त्व
भुवनेश्वर में इस शिखर सम्मेलन का आयोजन ओडिशा राज्य और भारत के क्षेत्रीय अकादमिक पारिस्थितिकी तंत्र के लिए विशेष रणनीतिक महत्त्व रखता है:
[ ओडिशा के अकादमिक पारिस्थितिकी तंत्र पर रणनीतिक प्रभाव ]
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├── 1. क्षेत्रीय विश्वविद्यालयों के लिए वैश्विक अवसर (उत्कल वि.वि., VSSUT, KIIT, SOA)
├── 2. केंद्र वित्तपोषित संस्थानों के लिए प्रत्यक्ष सहयोग (IIT, NISER, AIIMS)
├── 3. ओडिशा के 'स्किल मॉडल' के साथ संरेखण (वर्ल्ड स्किल सेंटर)
└── 4. विरासत और सांस्कृतिक कूटनीति को बढ़ावा (कलिंग-BRICS विनिमय)
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"ओडिशा स्किल मॉडल" का प्रदर्शन: आने वाले अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडलों ने भुवनेश्वर में वर्ल्ड स्किल सेंटर (WSC) का दौरा किया, जो उद्योग 4.0 कौशल में युवाओं को प्रशिक्षित करने वाली एक उन्नत सुविधा है। प्रतिनिधियों ने अंतरराष्ट्रीय उद्योग मानकों के साथ राज्य स्तरीय तकनीकी शिक्षा के एकीकरण की सराहना की।
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अकादमिक पर्यटन और साझेदारी को बढ़ावा: ओडिशा के उच्च शिक्षण संस्थानों ने छात्र विनिमय और संयुक्त अनुसंधान पहलों के लिए ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका और यूएई के भाग लेने वाले विश्वविद्यालयों के साथ प्रारंभिक समझौतों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए।
Madhavisanvi